बच्चों में नेफ्रोटिक सिंड्रोम - Children Problem Nephrotic Syndrome

इस विषय में सभी लोगों को जानकारी है कि किडनी हमारे शरीर में क्या काम करती है और यह कैसे हमारे शरीर को स्वस्थ रखती है। अगर आप इस विषय में नहीं जानते तो हम आपको पुनः इस बारे में बता देते हैं, दरअसल किडनी हमारे शरीर में जितने भी अपशिष्ट उत्पाद और गैर जरूरी रसायनों को खून साफ़ करते हुए उन्हें पेशाब के जरिये शरीर से बहार निकाल देती है। किडनी के इस काम से हमारा शरीर हमेशा स्वस्थ बना रहता है और शरीर सही से विकास कर पाता है।लेकिन आज कल की बिगडती लाइफस्टाइल के चलते किडनी खराब हो जाती है।

 

पहले देखा जाता था कि किडनी व्यस्क और वृद्ध लोगो की खराब होती है, लेकिन बीते कुछ दशकों में इस किडनी रोगियों के उम्र में काफी बदलाव आया है। हाल के कुछ वर्षों में देखा गया है कि अब बच्चों और किशोर उम्र वालों की किडनी तेजी से खराब हो रही है। बच्चों की किडनी खराब होने के वैसे तो कई कारण है लेकिन सबसे बड़े कारण के बारे में बात की जाए तो वह है प्रोटीन लोस या प्रोटीनूरिया।प्रोटीनूरिया किडनी से जुड़ा एक ऐसी स्थिति है जिसमे प्रोटीन पेशाब के जरिये शरीर से बहार निकलने लग जाता है।प्रोटीनूरियाऔरनेफ्रोटिक सिन्ड्रोम यह तीनो एक ही तरह के किडनी रोग है जिसमे प्रोटीन शरीर से बहार निकलने लगता है।लेकिन नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम, प्रोटीनूरियासे काफी गंभीर रोग है क्योंकि इसमें किडनी रोग होने के अलावा स्थिति और भी आगे बढ़ जाती है, जिससे रोगी की जान जाने का खतरा भी बना रहता है।

नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम सबसे ज्यादा बच्चों में दिखाई देता है, फ़िलहाल इसके पीछे क्या कारण है इस बारे में कोई भी कोई पुष्टि नहीं है।बच्चों में नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम होने का सबसे बड़ा कारण ज्यादा दवाएं लेना और वंशानुगत माना जाता है। यदि बच्चे को ज्यादा दवाई दी जाए तो इसका किडनी पर बुरा असर पड़ने लगता है, जिसकी वजह से किडनी के फिल्टर्स क्षतिग्रस्त होने लगते हैं और किडनी रक्त को साफ़ करते हुए तमाम अपशिष्ट उत्पादों के साथ प्रोटीन को भी पेशाब के जरिये शरीर से बहार निकाल देती है। इसके अलावा अगर बच्चे के शरीर में ज्यादा प्रोटीन हो जाए तो किडनी अतिरिक्त प्रोटीन को पेशाब के जरिये शरीर से बहार निकाल देती है, लेकिन इस दौरान भी किडनी के फिल्टर्स क्षतिग्रस्त होने लग जाते है, जिसके फलस्वरूप किडनी खराब हो जाती है।

किडनी के इस रोग की वजह से किसी भी उम्र में शरीर में सूजन हो सकती है, परन्तु मुख्यतः यह रोग बच्चों में देखा जाता है। उचित उपचार से रोग पर नियंत्रण हो सकता है और बाद में पुनः सूजन दिखाई देने लग जाती है, यह सिलसिला सालों तक चलते रहना यह नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम की सबसे बड़ी निशानी है। लम्बे समय तक बार-बार सूजन होने की वजह से यह रोग मरीज और उसके पारिवारिक सदस्यों के लिए एक चिन्ताजनक रोग है। यदि आपको या आपके बच्चे के शरीर में बार-बार सूजन दिखाई दे तो आपको इस और ध्यान देने की आवश्यकता है।

नेफ्रोटिक सिड्रोम कैसे गंभीर है? - How To Serious Nephrotic Syndrome Problem?

सामान्य प्रोटीन लोस होने पर शरीर से सिर्फ शरीर से प्रोटीन बहार जाता है और कुछ शारीरिक समस्याओं का समाना करना पड़ता है, जिसे हम प्रोटीन लोस होने के लक्षणों के रूप में भी देखते हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति को नेफ्रोटिक सिड्रोम होता है तो उसे सामान्य समस्याओं के साथ-साथ कुछ गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है, जिनसे छुटकारा मिल पाना काफी मुश्किल होता है।

Ayurvedic Treatment and Medicine for Nephrotic Syndrome

नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम में जो संभावित जटिलताएं होती है उनमे जल्दी संक्रमण होने का खतरा बना रहता है, यह संक्रमण पेशाब, पेट, रक्त और किडनी से संबंधित हो सकता है। इसके अलावा नस में रक्त के थक्के जमना (डीप वेन थ्रोम्बोसिस) औररक्ताल्पता जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं इस दौरान कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ने लगता है साथ ही ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या भी हो जाती है, जिसकी वजह से हृदय रोग होने की संभवना काफी बढ़ जाती है। इसमें किडनी का खराब होना भी शामिल है, तो इसलिए इस रोग को हल्के में लेना सबसे बड़ी भूल होती है।

नेफ्रोटिक सिड्रोम के मुख्य लक्षण क्या है? - Symptoms of Nephrotic Syndrome

  1. नींद से सुबह उठते हैं तब सूजन का ज्यादा दिखाई देना।
  2. इस रोग की शुरूआत बुखार और खांसी के बाद होती हैं।
  3. आंखों के नीचे और चेहरे पर सूजन।
  4. आंखों पर सूजन होने के कारण कई बार मरीज सबसे पहले आंख के डॉक्टर के पास जांच के लिए जाते हैं।
  5. ये सूजन दिन के बढ़ने के साथ-साथ धीरे-धीरे कम होने लगती है और शाम तक बिल्कुल कम हो जाती हैं।
  6. कई बार पेशाब में झाग आने और जिस जगह पर पेशाब किया हो, वहां सफेद दाग दिखाई देने की शिकायत होती हैं।
  7. रोग बढ़ने पर पेट फूल जाता हैं, पेशाब कम होता है, पूरे शरीर में सूजन आने लगती है और वजन बड़ जाता हैं।
  8. नेफ्रोटिक सिड्रोम 2 से 6 साल के बच्चों में ये रोग मुख्यत दिखाई देता हैं। अन्य उम्र के व्यक्तियों में इस रोग की संख्या बच्चों की तुलना में बहुत कम दिखाई देता हैं।

नेफ्रोटिक सिड्रोम से कैसे छुटकारा पाएं? - How To Escape from Nephrotic Syndrome Problem?

नेफ्रोटिक सिड्रोम से छुटकारा पाने का सबसे आसान उपचार है आयुर्वेदिक उपचार। आयुर्वेदिक उपचार में रोगी के रोग को जड़ से खत्म किया जाता है, न कि केवल कुछ समय के लिए राहत दी जाती है।नेफ्रोटिक सिड्रोम के उपचार के लिए कर्मा आयुर्वेदा में संपर्क कर सकते हैं जहाँ हर किडनी रोग को केवल आयुर्वेदिक औषधियों और आहार की मदद से ठीक किया जाता है।

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